अपने ही देश में सीमा विवाद

असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद हिंसक हो चुका है। दोनों राज्यों के बीच हुए हिंसक संघर्ष में असम पुलिस के कम से कम पांच जवानों की मौत हो चुकी है। मामला बढ़ता देख केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की तैनाती की गई है।

अपने ही देश में सीमा विवाद
असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद हिंसक हो चुका है। दोनों राज्यों के बीच हुए हिंसक संघर्ष में असम पुलिस के कम से कम पांच जवानों की मौत हो चुकी है। मामला बढ़ता देख केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की तैनाती की गई है। हालांकि असम और मिजोरम के बीच विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले अक्टूबर 2020 में असम और मिजोरम के नागरिकों के बीच हुए झड़प में 8 लोग घायल हो गए थे। असम का मिजोरम के साथ कई और राज्यों से भी सीमा विवाद है। आइए जानते हैं कि असम का मिजोरम से साथ किन राज्यों से सीमा विवाद है?
 
सबसे पहले असम और मिजोरम की बात
 
असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद की शुरुआत 1980 के दशक में मिजोरम के गठन के बाद से ही है। दोनों राज्य तकरीबन 165 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं। इनके बीच सीमा विवाद की जड़ ब्रिटिश शासन काल में जारी दो अधिसूचनाएं हैं। मिजोरम राज्य के गठन से पहले यह इलाका असम का एक जिला था जिसे लुशाई हिल्स जिले के रूप में जाना जाता था। वर्ष 1875  में जारी अधिसूचना के जरिए लुशाई हिल्स को कछार के मैदानी इलाकों से अलग किया गया। दूसरी अधिसूचना वर्ष 1933 में जारी की गई, जिसमें लुशाई हिल्स और मणिपुर के बीच की सीमा का सीमांकन किया गया।
 
मिजोरम का मानना ​​है कि असम और मिजोरम के बीच सीमा का विभाजन वर्ष 1875 की अधिसूचना के आधार पर किया जाना चाहिए। मिजोरम के लोगों का मानना है कि वर्ष 1933 की अधिसूचना को जारी करने के संबंध में स्थानीय लोगों से परामर्श नहीं किया गया था। दूसरी ओर, असम के प्रतिनिधि ब्रिटिश काल के दौरान वर्ष 1933 में जारी अधिसूचना का पालन करते हैं और दोनों राज्यों के बीच विवाद का यही मुख्य कारण है। हालांकि असम और मिजोरम की सरकारों के बीच दोनों राज्यों की सीमाओं पर यथास्थिति बनाए रखने को लेकर समझौता हुआ था, लेकिन समय-समय पर हिंसक झड़पें होती रहती हैं।
 
असम का नागालैंड से कैसा विवाद?
 
असम का नागालैंड के साथ सबसे भयंकर सीमा विवाद रहा है। 1963 में जब नागालैंड को असम के नागा हिल्स जिले से अलग कर नया प्रदेश बनाया गया था, उसी वक्त से नागालैंड असम से ऐसे हिस्सों की मांग कर रहा है, जिसे नागालैंड 'ऐतिहासिक' रूप से अपना हिस्सा मानता है।
 
नागालैंड सरकार का इस बात पर जोर रहा है कि 1960 के जिस 16-सूत्रीय समझौते के तहत नागालैंड का गठन हुआ, उसमें उन सभी नागा क्षेत्रों की 'बहाली' भी शामिल थी, जिन्हें 1826 में अंग्रेजों द्वारा असम पर कब्जा करने के बाद नागा पहाड़ियों से अलग कर दिया गया था। वहीं असम सरकार का रुख 'संवैधानिक रूप से' सीमा को बनाए रखने का है। इसका मतलब ये है कि असम 1 दिसंबर, 1963 को बने नागालैंड के कानून के तहत सीमा को मानती है। और यही दोनों राज्यों के बीच विवाद का मुख्य कारण है।
 
असम का मेघालय से सीमा विवाद क्यों है?
 
जब तक मेघालय असम का हिस्सा था, तब तक शिलांग असम की राजधानी थी। 1972 में मेघालय के अलग होने के बाद से ही दोनों राज्यों के बीच सीमा को लेकर विवाद जारी है। हाल ही में असम और मेघालय के मुख्यमंत्री ने उन 12 जगहों की पहचान की है जहां दोनों राज्यों के बीच विवाद है। मुख्य विवाद असम के कामरूप जिले और मेघालय के पश्चिम गारो हिल्स जिले की जमीन को लेकर है। दोनों राज्य मौजूदा वक्त में विवादास्पद जगहों पर यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में हैं जब तक कि दोनों राज्यों के बीच कोई समझौता न हो जाता।
 
असम का अरुणाचल प्रदेश से भी विवाद
 
अरुणाचल प्रदेश से असम का विवाद 1990 के दशक शुरू हुआ जब दोनों राज्यों ने एक दूसरे की जमीन पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया था। विवाद को लेकर स्थानीय लोगों के बीच साल 2007 में झड़प भी हो चुकी है। असम सरकार अपने दावों के साथ 1989 में सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी लेकिन अब तक इस मसले का समाधान नहीं हो सका है।