मोदी का सवाल मोदी से - खाता भी हूं और गुर्राता भी हूं

मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो वे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सवाल पूछा करते थे।आज वहीं सवाल भारतीय जनता उनसे कर रहीं हैं ? आप इन सवालों का जवाब सार्वजनिक करें।

मोदी का सवाल मोदी से  - खाता भी हूं और गुर्राता भी हूं

मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो वे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सवाल पूछा करते थे।आज वहीं सवाल भारतीय जनता उनसे कर रहीं हैं ? आप इन सवालों का जवाब सार्वजनिक करें। ये जो आतंकवादी,नक्सलवादी हैं। उनके पास अस्त्र और शस्त्र कहां से आता हैं।वो तो विदेश की धरती से आता हैं और सीमाएं सम्पूर्ण रूपसे भारत सरकार के कब्ज़े में हैं। आतंकवादियों के पास गण आता हैं।वो हवाओं से आता हैं। पूरा का पूरा ट्रांजेक्शन का कारोबार भारत सरकार के कब्ज़े में हैं। आर.बी.आई.के अंदर में हैं।बैंकों के माध्यम से होता हैं।क्या आप इतनी निगरानी नहीं रख सकते।विदेशी फंड आतंकवादियों से आता हैं। विदेशों से घुसपैठियों आते हैं। आतंकवादियों के रूप में आते हैं। आतंकवादी घटनाएं करते हैं और भाग जाते हैं।सीमाएं आपके हाथों में हैं तो फिर आतंकवादी घटनाएं करके कैसे भाग जाते हैं। सारा कम्युनिकेशन भारत सरकार के हाथों में हैं। कोई भी टेलीफोन पर बात करता हैं।ई.मेल.करता हैं तो भारत सरकार उसे बन्द कर सकती हैं या जानकारी पा सकती हैं कि आतंकवादी गतिविधि के अंदर कौन सा कार्य चल रहा हैं।आप उसे रोक नहीं सकते।
विदेशों में जो आतंकवादी भगा चूके हैं और विदेशों में जो बैठकर आतंकवाद की घटनाएं कर रहें हैं उन्हें प्रत्यारोपण के द्वारा हमें भारत लाने का अधिकार हैं।आपकी विदेश नीति के क्या ताकत हैं।राजनीति के खेल छोड़ दीजिए।आज देश की जनता आपसे सवाल पूछ रहीं हैं।
देश की जनता मोदी जी आपसे ही यह सवाल पूछ रहीं हैं कि आज जो देश में कोरोना का खेल चल रहा हैं।यह कोरोना विदेशों से भर भरकर किसने लाया।
कोरोना के प्रसार की वाहक गरीब व आम जनता कदापि नहीं होते।nप्रायः धनी बढ़े हुए लोग,धनाकांक्षी,बड़े व्यापारी,आगे बढ़ने की चाह में लगे लोग होते हैं।यह लोग जहाँ भी जाते हैं वहाँ के स्थानीय समुदाय और आम जनता,खासकर गरीब लोग महामारियों के पैसिव रेसिपीएट होते हैं।जो बाद में तब्दील हो जाते हैं।
कोरोना महामारी भी उद्यमियों,बड़े धनी व्यापारियों,प्रवासियों,गायकों और पर्यटकों के माध्यम से विदेशों से भारत में एक दूसरे क्षेत्रों में फैली हैं। जिसे हवाई जहाज में भर  भरकर उनलोगों ने लाया हैं।जिसे आपने रोकने का प्रयास आखिर क्यों नहीं किया ?
छह वर्षों में मोदी ने  1550 रैलियां कर चुका हैं।85 देशों की यात्राएं कर चुका हैं और लगभग दो लाख कीमत औसत वाली 23,4,55 ड्रेसेज पहन चुका  हैं।इसने जनता की टैक्स की पैसों में आग लगाई हैं। राफेल खरीद में भी इक्कीस हजार करोड़ की हेराफेरी हुई हैं।
लॉकडाउन जब जब लगता हैं तब तब मंत्री,सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी की सैलरी बन्द कर देनी चाहिए।सब याद रखा जाएगा कि जब देश में जनताओं की चिताएं जल रही थी,तब मोदी-शाह की चुनावी सभाएं चल रही थी।