लालू के साथ अब गरम होगी बिहार की सियासत, बंगाल के बाद यूपी चुनाव पर नजरें

चारा घोटाले में लंबे समय तक जेल में रहने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव अब बाहर हैं। करीब साढ़े चार साल बाद वह शुक्रवार को जेल के बाहर अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं।

लालू के साथ अब गरम होगी बिहार की सियासत, बंगाल के बाद यूपी चुनाव पर नजरें

चारा घोटाले में लंबे समय तक जेल में रहने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव अब बाहर हैं। करीब साढ़े चार साल बाद वह शुक्रवार को जेल के बाहर अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस दिन को राजद द्वारा सद्भावना दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। सभी प्रखंडों में लालू रसोई का भी आयोजन किया जा रहा है. जेल से बाहर आने के बाद लालू खुद अब बेटी मीसा भारती के दिल्ली स्थित आवास पर हैं, लेकिन माना जा रहा है कि वह जल्द ही बिहार आएंगे. पिछले तीन दशक से बिहार की राजनीति उन्हीं के इर्द-गिर्द घूम रही है. पक्ष हो या विपक्ष, किसी के लिए भी उन्हें नज़रअंदाज करना मुश्किल हो गया है. जेल में रहते हुए भी वह राजनीति से दूर नहीं रहे। राजद के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता भाई वीरेंद्र का कहना है कि साढ़े चार साल बाद लालू प्रसाद जेल से बाहर आए हैं, तो साफ है कि राजनीति नए सिरे से गरमा जाएगी. फिलहाल की नजर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर है।

बंगाल के बाद अब यूपी चुनाव पर नजर

राजद के भाई वीरेंद्र के मुताबिक, बंगाल (पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव) के बाद सभी की नजर उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव पर है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी तैयारी शुरू कर दी है। लालू भी उनसे दूर नहीं रह सकते। पिछली बार उन्होंने बिना शर्त अखिलेश यादव का समर्थन किया था। चुनावों से पहले, समाजवादी पार्टी (सपा) को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन करने की भी कोशिश की गई थी। इस बार भी उत्तर प्रदेश की सियासत लालू के दखल का इंतजार कर रही होगी.

मांझी और मुकेश की महत्वाकांक्षाओं को हवा देंगे

बिहार में भी लालू राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (एचएएम) के प्रमुख जीतन राम मांझी और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) मुकेश साहनी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में पीछे नहीं हैं. कर सकते हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद लालू ने रांची जेल (होटवार जेल, रांची) में रहते हुए भी इस तरह के प्रयास किए हैं. बिहार में आज भी राजनीति का पहिया घूम रहा है. लालू कई सालों से कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर बिहार में राजनीति कर रहे हैं. इस बार उन्होंने वामपंथी दलों से भी हाथ मिलाया है. इससे उन्हें राजद के पारंपरिक वोट बैंक को बनाए रखने में मदद मिली है।

बिहार में समीकरण बचाने की चुनौती

मुस्लिमों को यादवों से जोड़कर लालू ने अपनी सोशल इंजीनियरिंग में जो माई इक्वेशन बनाया है, उसे कोई भी पार्टी नजरअंदाज नहीं कर सकती है। लालू यादव के इस वोट बैंक पर उनके विरोधियों की नजर है. बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) लगातार सेंध लगाने की कोशिश कर रही है. कोरोना वायरस के संक्रमण में गिरावट के बाद अब राजनीतिक गतिविधियां सामान्य होंगी तो लालू के बिहार आने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इसे बचाने की होगी।